सोमवार, 4 जनवरी 2021

नया साल आया है

 *नव वर्ष के आगमन पर*

*(कवि दिनेश कुमार प्रजापत"तूफानी",सिकन्दरा दौसा)*

*की कलम से*



विपदाओं ने घेरा हमको,
सब पर संकट छाया है।
हारेगी विपदाएँ हमसे,
ये नया साल आया है।।


कितने कष्ट सहे थे हमने,

विपदाओं के साये थे।

खो न दे कहीं हम अपनों को,

सोच सोच घबराइए थे।।

बीत गई जो बातें पहले, 

उनको हमनें भूलाया है।

नव उत्साह,उमंग नव आस लिए,

ये नया साल आया है।।


बीता है जो वर्ष पुराना,

दिन में तारे दिखा गया।

संकट और चुनौतियों से ये,

लड़ना हमको सिखा गया।।

काम धंधा सब छुट गया,

हर कोई पछताया है।

अब आत्मनिर्भर होंगे हम,

ये नया साल आया है।।


विपदाओं ने घेरा हमको,

सब पर संकट छाया है।

हारेगी विपदाएँ हमसे,

ये नया साल आया है।।


आने दो नया साल फिर से, नव इतिहास रचायेंगे।।

 *आगामी नव वर्ष 2021 की हार्दिक शुभकामनाएं*


*(कवि दिनेश कुमार प्रजापत"तूफानी",सिकन्दरा)*

                      की कलम से


पथ भटक गये है हम जग से,

फिर रास्ता अपनाएंगे।

आने दो नया साल फिर से,

नव इतिहास रचाएंगे।।


ऊपर उठना है हमको अब,

उत्साह गिर ना पायेगा।

नव इतिहास लिखेगें अब हम,

जिसे हर इन्सान गाएगा।।

हमको समझे जो बालक तो,

अब उनको दिखलाएंगे।

आने दो नया साल फिर से,

नव इतिहास रचायेंगे।।


भूले नहीं मस्ती वाले दिन,

ना भूले हैं वो राते।

माता लोरियां सुनाती थी,

दादी कहती थी बाते।।

उन कहानी और लोरी से,

 नव निर्माण कर जायेंगे।

आने दो नया साल फिर से,

नव इतिहास रचायेंगे।।


मोह के तोड़ के बंधन अब,

अपने लक्ष्य को पाना हैं।

मुसीबत हो भले कैसी भी,

सब से अब लड़ जाना है।।

 मेंहनत करेगें अब तो हम, 

 अपना नाम कमाएंगे।

आने दो नया साल फिर से,

नव इतिहास रचायेंगे।।


मांगी थी मन्नत मां ने जो,

उनको पूरी करनी है।

उम्मीद है बापू की हमसे,

उनको पूरी करनी है।।

तम मिटे सब के जीवन का,

दीपक लो बन जायेंगे।

आने दो नया साल फिर से,

नव इतिहास रचायेंगे।।

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