बुधवार, 27 दिसंबर 2023

तूफानी छन्द

.         तूफानी छन्द

विधान :- १२ वर्ण, प्रतिचरण
चार चरण, दो दो समतुकांत
नगण  रगण  तगण  यगण
१११  २१२  २२१  १२२

.          जटिल प्रेम
कमल फूल सी आँखे लगती हो।
नयन धार वर्षा सी झरती हो। 
जटिल प्रेम राही को अटकाता। 
विमल कर्म से मानो भटकाता।।

मलय वात आती है सहता हूँ
उछल नींद जाती है कहता हूँ।
अब तरंग जागी है तन मेरे।
यह प्रतीत लागी है मन मेरे।

सतत पंख से पंछी उड़ते हैं। 
गरल शंभु ही धारा करते हैं।
कठिन है भुलाना ये सब नाते।
लेकिन याद है प्यारे कतराते।।

अटल धर्म के साथी बन जाना।
अब दिनेश तूफानी हित गाना। 
गण गणेश के द्वारे पर गाए। 
चढ़ पहाड़ की सीढ़ी सब आए।।

अटल बिहारी जी (मनहरण)

 हमेशा रहे अटल, धर्म के लिए अचल

शांति सुरक्षा के लिए, रहे अविराम है।


सर्व शिक्षा अभियान, है अटल पहचान

आज पग पग पर, लगे अभिराम है।


पल पल करे प्रीत, गाये नहीं झूठे गीत

हम सब का करते, जो एहतराम है।


देश के ख़ातिर जिए,ऐसी महान आत्मा को, 

कवि दिनेश तूफानी, करता प्रणाम है।

सोमवार, 25 सितंबर 2023

दोहा संग्रह

 भोर हुई दिन चढ़ गया, खग भी गाते गान।

त्यागो निद्रावेश जन , अब तो खुद को जान।।


ये साल भी बीत गया,नहीं मिली पर ठौर।

कोरोना के काल में,जाऊ मैं *किस और*।।


छोटे से एक गांव में,रहता नवल किशोर।

लोकार्पण पुस्तक का,नाम है *किस और*।।


माँ मूरत है स्नेह की, माँ जीवन का सार।

माँ मेरी पहचान है, माँ मेरा आधार।।


दूर रहे अज्ञानता, हो चित ज्ञान प्रकाश।

भक्ति भाव मिलता रहे, मुझको माँ से आस।।


उमड़ घुमड़ बादळ चल्यौ, चांद छुप्यौ गिगनार ।

जागै जा की ज़ीत हैं , सोवैं जा की हार।।


बढ़ता पेड़ बबूल का, कांटे ही बरसाय

डाली पर डाली लगी, फूल कहाँ पर आय


पत्थर पड़ा जमीन पर,दर दर ठोकर खाय

बने देव खा चोट को,हर जन शीश नवाय


नरकासुर का वध किया, उत्तम भये विचार।

चतुर्दर्शी थी रूप की, सजता रूप अपार।।


हिंदी है मेरा हिंदुस्तान


 *हिंदी है मेरा हिंदुस्तान*


वागीशा वंदन है हिंदी, माथे का चंदन हिंदी।

पन्ना का नंदन है हिंदी,गोरो का मर्दन हिंदी।।


सूरदास की वाणी में बस, भक्ति भाव सिखाती है।

तुलसी से तुलसीकृत होकर, रामायण बन जाती है।।


रस की खान रसखान में, मृदुल बनी है मीरा में।

दोहे बन कर उपजी हिंदी, सुबोध संत कबीरा में।।


अम्बर का पानी फुनगी पर, ओस बन चमचमाता है।

पुष्प खिले हो उपवन में तो, भंवरा गुनगुनाता है।।


अंग्रेजो की अंग्रेजी का, हमने था सम्मान किया।

हुए अत्याचार हिंदी पर, हमनें सीना तान लिया।।

 

हिंदी भाषा सीने में रख, मन ही मन इठलाता हूँ।

मुझे नहीं गाना इलू इलू, वन्दे मातरम् गाता हूँ।।


नहीं किसी से नफरत मुझको,नही मुझमे है अभिमान।

मां हिंदी है भाषा मेरी, हिंदी है मेरा हिंदुस्तान।।


रचनाकार

कवि दिनेश तूफानी, सिकन्दरा

दौसा, राजस्थान

सोमवार, 19 जून 2023

चौपाई छन्द

*चौपाई छन्द*

ज्येष्ठ भ्राता अनुज अनुरूपा,
निज नगर नहीं कोई दूजा।
देख छवि गयी मैं बलिहारी, 
रूप अनोखा है अति भारी।
पुर नूतन पीताम्बर साजे,
बाएं बाहु कमान विराजे।
चौदहों भवन तीनों लोका,
ऐसा रूप कबहुँ नहीं देखा।।

*रचनाकार*
*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*
*दौसा (राजस्थान)*

सरस्वती स्तुति

 *सुगति छन्द*


      7 मात्रा 

मपनियुक्त मात्रिक 

मापनी - गालगागा


*सुगति छन्द*

*सरस्वती स्तुति*


प्रेम पाना

गान गाना

ज्ञान दे माँ

शारदे माँ


रंग चोखा

है अनोखा

रूप दे माँ

शारदे माँ


छवि मनोहर

ह्रदय सागर

तार दे माँ

शारदे माँ


स्थान तेरा

स्नेह मेरा

मान दे माँ

शारदे माँ


*रचनाकार*

*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*

*दौसा (राजस्थान)*

रविवार, 18 जून 2023

धर्म की जीत

 *धर्म की जीत*

*हाइकू*


हे! पार्थ सुनो

मोह माया को त्यागो

शत्रु को चुनो।


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उठाओ तीर

कोई नहीं अपना

ना हो अधीर।


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नयन खोलो

शत्रु खड़ा सामने

हमला बोलो।


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नहीं है मीत

लड़ने से ही होगी

धर्म की जीत।


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*रचनाकार*

*कवि दिनेश तूफानी*

*सिकन्दरा, दौसा*


रंगी छन्द

रंगी छन्द  4 वर्ण मापनी - गालगागा पिंगल सूत्र - र ग शारदे माँ तारदे माँ ठान ऐसी  भान जैसी रात आयी  ज्योति छायी मान दे माँ शारदे माँ नींद आयी...