शनिवार, 29 मई 2021

दीपावली मुक्तक



झिलमिल सितारों के आँगन में दीप जलाएंगे,

लक्ष्मी पूजन के साथ बड़ो को शीश नवाएँगे ।

सुख समृद्वि और प्रकाश हो आपके जीवन में,

आप और हम ख़ुशी ख़ुशी दीपावली मनाएँगे।।



हुआ अविष्कार दीपक का ज्ञान प्रकाश उत्कर्षित हुआ।

दीपक के प्रकाश से ही अँधेरा स्वयं द्वारा ग्रसित हुआ।

चौदह वर्ष बाद राम आये तो जगमगा गयी थी अयोध्या

पुलकित हुयी सम्पूर्ण धरा,जब मन बड़ा ही हर्षित हुआ।।


श्रृंगार मुक्तक



तेरे बालों को सँवार कर गजरा सजा दूंगा,

ठिकाना पूछे कोई मेरा दिल तेरा बता दूंगा।

मेरे साथ मिलकर कुछ समय गुजारो यार

तेरी याद को मैं सुहानी शाम बना दूंगा।।


वहम तेरा की तेरी हँसी को भुला दूंगा,

फूलों से आती खुसबू  को भुला दूंगा।

कोई माने या ना माने मैं तो मानता हूँ,

तेरे दिल को तो मेरा दीवाना बना दूंगा।।



ईद (मुक्तक)


 केसर की क्यारी से खुसबू महकती रहे,

आसमा से चाँद की चाँदनी चमकती रहे।

मालिक खुश रखे तुम्हारे प्यारे परिवार को,

और हर रोज आपके घर ईद मनती रहे।।

रंगी छन्द

रंगी छन्द  4 वर्ण मापनी - गालगागा पिंगल सूत्र - र ग शारदे माँ तारदे माँ ठान ऐसी  भान जैसी रात आयी  ज्योति छायी मान दे माँ शारदे माँ नींद आयी...