रविवार, 30 जनवरी 2022

शेर*

 *गज़ल*

*बहर 2122 2122 1222*

छोड़ दी नफरत मिरे में जरा सी भी
गैर से मोहब्बत के फायदे का क्या

वो नहीं आये मिरी मय्यत पर भी अब
तोड़ तूने ही दिये वायदे का क्या

बन नही पायी ग़ज़ल "तूफानी" अब भी
अब हवा जो हो रहे कायदे का क्या

रचनाकार:-
*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*

बुधवार, 26 जनवरी 2022

मेरा भारत महान है



*आप सभी को गणतंत्रता दिवस की मंगलमय हार्दिक शुभकामनाएं*
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*मेरा भारत महान है*


तीन रंगो से बना तिरंगा,
हर भारती की शान है।
इसलिए ही तो लोग कहते,
मेरा भारत महान है।।

केसरिया रंग मान बढ़ावे,
वीरो में उत्साह भरे।
देख केसरिया रंग रण में,
दुश्मन की रूह भी डरे।।

ऐसी वीरभूमि भारत पर,
बसते बली बलवान है।
इसलिए ही तो लोग कहते,
मेरा भारत महान है।।

सफेद रंग शांति मार्ग पर,
चलना हमको सिखलाये।
विश्व शान्ति वाला पाठ पढा,
विश्व गुरु वैभव बन जाये।

अशोक चक्र चौबीस तीलियाँ,
सब धर्मो की पहचान है।
इसलिए ही तो लोग कहते,
मेरा भारत महान है।।

हरे रंग की ये हरियाली,
खेतों में खलिहान करें।
राजा रंक या हो भिखारी,
सब खेतों से पेट भरें।

देख कर खेत में हरियाली,
यहाँ पर सुखी किसान है।
इसलिए ही तो लोग कहते,
मेरा भारत महान है।।

चमकता ताज हिमालय राज,
सागर पैर पखार रहा।
कहीं रेगिस्थान कहीं बरखा,
कहीं दक्खन पठार रहा।।

तूफानी की काव्य सरिता,
की बस यही पहचान है।
इसलिए ही तो लोग कहते,
मेरा भारत महान है।।
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*-: रचनाकार :-*
*कवि दिनेश प्रजपति"तूफानी"*
*सिकन्दरा,दौसा(राजस्थान)*

बुधवार, 12 जनवरी 2022

विवेकानन्द (मनहरण छन्द)



जिसका कंठ सुरीला,था युवा नेता छबीला

माँ शारदे के लाल की आरती उतारेंगे।


ऊँच नीच को मिटाया,नारी शिक्षा को बढ़ाया

विवेकानंद के पद,राम से पखारेंगे।


भारती के पूत उठो,जागो तब तक भागो

लक्ष्य नहीं मिले यदि,जन्म जन्म वारेंगे।


धर्मो का किया सम्मान,नहीं किया अपमान

ऐसी महान आत्मा को, मन में उतारेंगे।


रचनाकार

कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

हास्य मनहरण छन्द

 मनहरण छन्द


सुनो मैं एक कुँवारा,शादी का हूँ मारा मारा,

नारी मिले सुन्दर तो,शादी करवाइये।


छम्मा छम्मा डांस करे,रात में रोमांस करे,

काजोल सी चाल चले,ऐसी बतलाइये।


करीना से बाल होवे,बिपाशा से गाल होवे,

सनी लियोनी सी दिखे,ऐसी दिखलाइये।


नहीं मिले कोई नारी, तो सुन ले तूफानी

दो बच्चों की माँ से ही शादी करवाइये।


रचनाकार:-

कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा

रंगी छन्द

रंगी छन्द  4 वर्ण मापनी - गालगागा पिंगल सूत्र - र ग शारदे माँ तारदे माँ ठान ऐसी  भान जैसी रात आयी  ज्योति छायी मान दे माँ शारदे माँ नींद आयी...