जिसका कंठ सुरीला,था युवा नेता छबीला
माँ शारदे के लाल की आरती उतारेंगे।
ऊँच नीच को मिटाया,नारी शिक्षा को बढ़ाया
विवेकानंद के पद,राम से पखारेंगे।
भारती के पूत उठो,जागो तब तक भागो
लक्ष्य नहीं मिले यदि,जन्म जन्म वारेंगे।
धर्मो का किया सम्मान,नहीं किया अपमान
ऐसी महान आत्मा को, मन में उतारेंगे।
रचनाकार
कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें