रविवार, 20 सितंबर 2020

विधार्थी जीवन (हास्य कविता)


बता मित्र तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है,
लोह पथ गामिनी की तरह दौड़ रही है।
खूब मन से पढ़ाई करता हूं दिन-रात,
न जाने छोरियां क्यू पीछे छोड़ रही है।।

यह बात मुझे भी समझ नहीं आती है,
कि यह छोरियां स्मृति काहे से बढ़ाती है।
काजू,बादाम,पिस्ता खूब खाता हूँ,
फिर भी कक्षा में अव्वल नहीं आता हूँ।।

पास होने के लिए लड़कियां नेट चलाती हैं,
मेरी मां मेरे लिए अखंड ज्योति जलाती है।
मैं हो जाऊं पास इस उम्मीद में मेरी भुआ,
फूफाजी से हर महीने गुड-चने बँटवाती है।।

छोरियाँ वेशभूषा ही ऐसी पहन कर आती है,
पाठशाला के छोरो का जी ललचा जाती है।
दिनभर कहते हैं ये तेरी भाभी वह मेरी भाभी,
तभी हम फैल और छोरियाँ पास हो जाती हैं।।

हँसने की क्या बात है

सब बच्चे हंसने लगे तो
केके जी जी बोले इसमें हंसने की क्या बात है।

गुरूजी बोले गाय से हमें दूध मिलता है,मक्खन मिलता है,
और मिलती छाछ है।
इतने में एक बच्चा बोला
नहीं नहीं गुरुजी हमें गाय दूध ही नहीं देती है।
देती कुछ और भी है
वह भी गोबर और मारती लात है।
सब बच्चे हंसने....................................

गुरुजी ने हमें नरेगा के बारे में बताया
इस योजना को 25 अगस्त 2005 में चलाया
शुरू में इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम कहा
लेकिन 2 अक्टूबर 2009 को इसका पुनः नामकरण करवाया
एक बच्चा खड़ा हुआ और बोला इसमें जुड़ने के लिए क्या दस्तावेज है
सबसे इंपोर्टेंट तो इसमें फावळी और परात हैं
सब बच्चे हंसने....................................

गुरूजी बोले आप कुछ नहीं जानते अखबार लिया करो
बच्चा खड़ा हुआ और बोला मैं भी खूब अखबार लेता हूँ।
जागरण,भास्कर,नवज्योति,पत्रिका,हिंदी हो या अंग्रेजी सब का सच्चा क्रेता हूँ।
गुरूजी बोले इतना को कैसे पढ़ते हो
बच्चा बोला यह भी बात साफ कर देता हूँ।
पढ़ने का तो कोई जिक्र नहीं मैं तो कबाड़ी हूँ।
रद्दी खरीद ता हूँ वह भी रुपए किलो सात है।
सब बच्चे हंसने....................................

कितना समझाया तुझे कुछ बनना है तो पढ़ना होगा
डॉक्टर,इंजीनियर,इंस्पेक्टर के लिए तुझे जगना होगा
लेकिन बच्चा तो शरारती था वह यू बोल पड़ा
डॉक्टर,इंजीनियर बनना इतनी सी बात है
तो क्यु नहीं बन पाया वह डॉक्टर
क्योंकि जगता तो उल्लू भी सारी रात है
सब बच्चे हंसने....................................

गलती को माफ करना दिनेश का बखान है।
देश अपनी शान है देश अपनी जान है।
राष्ट्रीय सेवा योजना ही इसकी पहचान है
पाक कहता है कि कश्मीर लेकर मानेंगे
लेकिन हम कहते हैं, तू हाथ लगा इंडिया को
अगर तेरे बाप में औकात है।
इतने में केके जी बोले,वाह वाह क्या बात है।

शुक्रवार, 18 सितंबर 2020

घर-संसार है बेटी

जग तरादे वह नाव है बेटी
पिता की प्यारी चाव है बेटी
मत पडने दो छाया दरिंदो की
क्योंकि पेड़ों सी छांव है बेटी

बहती नदी का कूल है बेटी
बड़े बरगदो का मूल है बेटी
क्यों तोड़ते हो मासूम कली को
आंगन का खिला फूल है बेटी

लक्ष्मी सी करामात है बेटी
सूखे में भी बरसात है बेटी
क्यों लूटते हो इज्जत किसी की
भाई बहन का साथ है बेटी

माता का श्रृंगार है बेटी
घर महके वो बयार है बेटी
मत मारना कभी कोंख में को इनको
क्योंकि खुद घर संसार है बेटी

तपती धरती

धरती तपती देखी तो मानव घबरा गया
शिकायतों का पुलिंदा लेकर कैलाश पर्वत आ गया
कैलाश पर पार्वती संग बैठे थे भोले
मानव भोले से ऐसे बोले
बचा लो प्रभु अब नहीं सहन हो पाएगा
गर्मी इतनी बढ़ गई कि ऐ.सी. भी फेल हो जाएगा
इतनी सुन भोले ने सूर्य देव को बुलवाया
सूर्यदेव कैलाश पर्वत आया और फिर मुस्कुराया
भोले बोले मानव शिकायत ले आया है
तुझे कोई गम नहीं तू क्यों मुस्कुराया है
सूर्य बोला इसमें मेरी क्या गलती है
मानव इतना प्रदूषण फैला रहा है
जिससे धरती बेवजह तपती है
जिससे धरती बेवजह तपती है

रंगी छन्द

रंगी छन्द  4 वर्ण मापनी - गालगागा पिंगल सूत्र - र ग शारदे माँ तारदे माँ ठान ऐसी  भान जैसी रात आयी  ज्योति छायी मान दे माँ शारदे माँ नींद आयी...