. तूफानी छन्द
विधान :- १२ वर्ण, प्रतिचरण
चार चरण, दो दो समतुकांत
नगण रगण तगण यगण
१११ २१२ २२१ १२२
. जटिल प्रेम
कमल फूल सी आँखे लगती हो।
नयन धार वर्षा सी झरती हो।
जटिल प्रेम राही को अटकाता।
विमल कर्म से मानो भटकाता।।
मलय वात आती है सहता हूँ
उछल नींद जाती है कहता हूँ।
अब तरंग जागी है तन मेरे।
यह प्रतीत लागी है मन मेरे।
सतत पंख से पंछी उड़ते हैं।
गरल शंभु ही धारा करते हैं।
कठिन है भुलाना ये सब नाते।
लेकिन याद है प्यारे कतराते।।
अटल धर्म के साथी बन जाना।
अब दिनेश तूफानी हित गाना।
गण गणेश के द्वारे पर गाए।
चढ़ पहाड़ की सीढ़ी सब आए।।
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