मंगलवार, 28 दिसंबर 2021

सुना है,दीवारों के कान है

 



*छन्द मुक्त कविता*


सुना है,दीवारों के कान है

अगर कान है तो सुनती भी होगी

सुनती है तो बोलती भी होगी।

जब दीवारें बोलती है घर की,

तो बाहर तक आवाजें जाती है।

कान लगा कर देखो दीवार पर,

कम्पन्न सुनाई देता है।

सुनो ध्यान से कंठों से निकला

रुदन सुनाई देता है।

जिन घरों की बोलती है दीवारें

उन घरों में विनाश दिखाई देता है।

दीवारों को मत सुनाओ

मत सुनाओ क्या?

दो भाइयों के बीच दीवार

ही मत बनाओ।

ना होगें कान,ना होगी दीवार,

और ना ही होगी कभी तकरार,

जिस घर में नहीं पड़ेगी दरार,

उन में बरसेगा भरपूर प्यार।



रचनाकार:-

कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा

मंगलवार, 14 दिसंबर 2021

बदला जाता है जग सारा

*बदला जाता है जग सारा*

गुजर गया वह समय पुराना,यह भी गुजरा जाता है।
बदला जाता है जग सारा, नया रूप झलकाता है।।

बैठे तरुवर की छाया में, संगत करते थे बाते ,
अपनी अपनी सब कहते थे,कथा सुनाती थी राते।

किस्से व कहानी सुनने को,ह्रदय बहुत मचलाता है,
बदला जाता है जग सारा, नया रूप झलकाता है।।

डिजिटल हो गया अब आदमी,मोबाइल की दुनिया में,
राम नाम सब को छोड़ दिया, हैलो- हैलो दुनिया में।

तोड़ के सारे बंधन को अब, बहुत बहुत इठलाता है,
बदला जाता है संसार अब, नया रूप झलकाता है।।

व्हाट्सएप्प व ई-मेल ने, बदल दिया अब दुनिया को,
घर बैठे ही चैटिंग करते, क्यू समझाये दुनिया को ।

प्रहार कर श्वेत कपोतों पर, लिखे खत भुला जाता है,
बदला जाता है संसार अब, नया रूप झलकाता है।।

बचपन में था अमीर पहले,हवाईजहाज उड़ाता,
पानी में कागज की किश्ती,भव से पार उतर जाता।

दिनरात करी कमाई और,संध्या को दे जाता है,
बदला जाता है संसार अब, नया रूप झलकाता है।।

गीतों के संग कुऐ घाट पर, भरती पनिहारी पानी,
पोखर नदियां सुख गए और,याद दिला दी अब नानी।

कौन भरे अब नल से गागर,फिल्टर पानी आता है,
बदला जाता है संसार अब, नया रूप झलकाता है।।

शनिवार, 29 मई 2021

दीपावली मुक्तक



झिलमिल सितारों के आँगन में दीप जलाएंगे,

लक्ष्मी पूजन के साथ बड़ो को शीश नवाएँगे ।

सुख समृद्वि और प्रकाश हो आपके जीवन में,

आप और हम ख़ुशी ख़ुशी दीपावली मनाएँगे।।



हुआ अविष्कार दीपक का ज्ञान प्रकाश उत्कर्षित हुआ।

दीपक के प्रकाश से ही अँधेरा स्वयं द्वारा ग्रसित हुआ।

चौदह वर्ष बाद राम आये तो जगमगा गयी थी अयोध्या

पुलकित हुयी सम्पूर्ण धरा,जब मन बड़ा ही हर्षित हुआ।।


श्रृंगार मुक्तक



तेरे बालों को सँवार कर गजरा सजा दूंगा,

ठिकाना पूछे कोई मेरा दिल तेरा बता दूंगा।

मेरे साथ मिलकर कुछ समय गुजारो यार

तेरी याद को मैं सुहानी शाम बना दूंगा।।


वहम तेरा की तेरी हँसी को भुला दूंगा,

फूलों से आती खुसबू  को भुला दूंगा।

कोई माने या ना माने मैं तो मानता हूँ,

तेरे दिल को तो मेरा दीवाना बना दूंगा।।



ईद (मुक्तक)


 केसर की क्यारी से खुसबू महकती रहे,

आसमा से चाँद की चाँदनी चमकती रहे।

मालिक खुश रखे तुम्हारे प्यारे परिवार को,

और हर रोज आपके घर ईद मनती रहे।।

मंगलवार, 30 मार्च 2021

प्यारे रंग में रंग दो सबको


 *प्यारे रंग में रंग दो सबको*


होली यह त्यौहार प्रेम का,

मिलकर आओ हम खेले।

रंग दे बसंती चोला रंग से,

गलीयों में टोली मेले।।


भेद भाव को छोडो भैया,

सबको गले लगाओ रे।

प्यारे रंग में रंग दो सबको,

होली रोज मनाओ रे।।


प्रेम रंग में बस जाओ तुम भी,

राधे-श्याम याद कर लो।

गोकुल की होली का रंग भर,

प्रेम मधुरता भाव भर लो।।


झूम झूम के नाँचे गाये,

खा के भंग की गोली रे।

होली का हुड़दंग तूफानी,

आओ खेले होली रे।।



रविवार, 28 फ़रवरी 2021

प्यारा बसन्त

गीतों का मल्हार लिए,

फूलों का श्रंगार लिए।

खिल गए फूल अनन्त,

आ गया देखो प्यारा बसंत।


फूलों से खेत हो रहे हरे-भरे,

पक्षी गीत गा रहे भावना भरे।

नर नारी और झूमे साधु संत,

आ गया देखो प्यारा बसंत।।


नदियां फूलों से श्रृंगार करें,

धरा भी किरणों से मांग भरे।

गज भी मांजे अपने दन्त,

आ गया देखो प्यारा बसंत।।


जीवन का हर पल नया होगा,

उत्साह और उमंग भरा होगा।

रंगों की बहार है चली अनन्त,

आ गया देखो प्यारा बसंत।।


रातें भी अब सिकुड़ जाएंगी,

नव में नई ज्योति छा जाएगी।

तभी हो जाएगा सर्दी का अंत,

आ गया देखो प्यारा बसंत।।


गा रही कोयल मीठे गान,

भँवरे भी भर रहे हैं तान।

तूफानी सूंघ रहा है सुगंध,

आ गया देखो प्यारा बसंत।।

सोमवार, 4 जनवरी 2021

नया साल आया है

 *नव वर्ष के आगमन पर*

*(कवि दिनेश कुमार प्रजापत"तूफानी",सिकन्दरा दौसा)*

*की कलम से*



विपदाओं ने घेरा हमको,
सब पर संकट छाया है।
हारेगी विपदाएँ हमसे,
ये नया साल आया है।।


कितने कष्ट सहे थे हमने,

विपदाओं के साये थे।

खो न दे कहीं हम अपनों को,

सोच सोच घबराइए थे।।

बीत गई जो बातें पहले, 

उनको हमनें भूलाया है।

नव उत्साह,उमंग नव आस लिए,

ये नया साल आया है।।


बीता है जो वर्ष पुराना,

दिन में तारे दिखा गया।

संकट और चुनौतियों से ये,

लड़ना हमको सिखा गया।।

काम धंधा सब छुट गया,

हर कोई पछताया है।

अब आत्मनिर्भर होंगे हम,

ये नया साल आया है।।


विपदाओं ने घेरा हमको,

सब पर संकट छाया है।

हारेगी विपदाएँ हमसे,

ये नया साल आया है।।


आने दो नया साल फिर से, नव इतिहास रचायेंगे।।

 *आगामी नव वर्ष 2021 की हार्दिक शुभकामनाएं*


*(कवि दिनेश कुमार प्रजापत"तूफानी",सिकन्दरा)*

                      की कलम से


पथ भटक गये है हम जग से,

फिर रास्ता अपनाएंगे।

आने दो नया साल फिर से,

नव इतिहास रचाएंगे।।


ऊपर उठना है हमको अब,

उत्साह गिर ना पायेगा।

नव इतिहास लिखेगें अब हम,

जिसे हर इन्सान गाएगा।।

हमको समझे जो बालक तो,

अब उनको दिखलाएंगे।

आने दो नया साल फिर से,

नव इतिहास रचायेंगे।।


भूले नहीं मस्ती वाले दिन,

ना भूले हैं वो राते।

माता लोरियां सुनाती थी,

दादी कहती थी बाते।।

उन कहानी और लोरी से,

 नव निर्माण कर जायेंगे।

आने दो नया साल फिर से,

नव इतिहास रचायेंगे।।


मोह के तोड़ के बंधन अब,

अपने लक्ष्य को पाना हैं।

मुसीबत हो भले कैसी भी,

सब से अब लड़ जाना है।।

 मेंहनत करेगें अब तो हम, 

 अपना नाम कमाएंगे।

आने दो नया साल फिर से,

नव इतिहास रचायेंगे।।


मांगी थी मन्नत मां ने जो,

उनको पूरी करनी है।

उम्मीद है बापू की हमसे,

उनको पूरी करनी है।।

तम मिटे सब के जीवन का,

दीपक लो बन जायेंगे।

आने दो नया साल फिर से,

नव इतिहास रचायेंगे।।

रंगी छन्द

रंगी छन्द  4 वर्ण मापनी - गालगागा पिंगल सूत्र - र ग शारदे माँ तारदे माँ ठान ऐसी  भान जैसी रात आयी  ज्योति छायी मान दे माँ शारदे माँ नींद आयी...