*बदला जाता है जग सारा*
गुजर गया वह समय पुराना,यह भी गुजरा जाता है।
बदला जाता है जग सारा, नया रूप झलकाता है।।
बैठे तरुवर की छाया में, संगत करते थे बाते ,
अपनी अपनी सब कहते थे,कथा सुनाती थी राते।
किस्से व कहानी सुनने को,ह्रदय बहुत मचलाता है,
बदला जाता है जग सारा, नया रूप झलकाता है।।
डिजिटल हो गया अब आदमी,मोबाइल की दुनिया में,
राम नाम सब को छोड़ दिया, हैलो- हैलो दुनिया में।
तोड़ के सारे बंधन को अब, बहुत बहुत इठलाता है,
बदला जाता है संसार अब, नया रूप झलकाता है।।
व्हाट्सएप्प व ई-मेल ने, बदल दिया अब दुनिया को,
घर बैठे ही चैटिंग करते, क्यू समझाये दुनिया को ।
प्रहार कर श्वेत कपोतों पर, लिखे खत भुला जाता है,
बदला जाता है संसार अब, नया रूप झलकाता है।।
बचपन में था अमीर पहले,हवाईजहाज उड़ाता,
पानी में कागज की किश्ती,भव से पार उतर जाता।
दिनरात करी कमाई और,संध्या को दे जाता है,
बदला जाता है संसार अब, नया रूप झलकाता है।।
गीतों के संग कुऐ घाट पर, भरती पनिहारी पानी,
पोखर नदियां सुख गए और,याद दिला दी अब नानी।
कौन भरे अब नल से गागर,फिल्टर पानी आता है,
बदला जाता है संसार अब, नया रूप झलकाता है।।