मंगलवार, 3 मार्च 2020

भारत का सैनिक

अपने ही घर में सेना से,
पत्थर वाले ऐंठे है।
सुकमा में नक्सली जवानो,
की लाशों पे बैठे है।।

जाने किस नशे में खो गए,
ये नेता गद्दी  वाले।
प्रवक्ता  इस तरह बनते है,
जैसे हो रद्दी वाले।।

सुकमा में शहीद हुये जो,
किसी बहन के भाई थे।
अपने ही मात-पिता की वो,
ज़िन्दगी की कमाई थे।।

जिस छप्पन इंची सीने से,
बड़े- बड़े घबराते है।
फिर भी क्यूँ हमारे सैनिक,
घर में थप्पड़ खाते है।।

जज्बा है सब कुछ करने का,
करता  कहता वो मोदी।
पर्वत के चट्टानों से ही,
झरना बहता वो मोदी।।

शीश झुका दिनेश नमन करे,
उन सैनिक मतवालो को।
मातृभूमि पर मिटने वाले,
भारत के रखवालो को।।

मुक्तक


जाने से पहले वो हमे जोश जवानी दे गए
गाता रहूँ गुणगान उनका ऐसी कहानी दे गए
मिटा न सका कभी मैं प्यास मेरी ही
             पर वो हमारे सुखे पलकों को पानी दे गए।।

सोमवार, 2 मार्च 2020

मनहरण छन्द

नीच पाक ने दोबारा हमारे शेरों को मारा
कायर है खुद बता दिया हिंदुस्तान को

कभी निशाना बनाया ताज कभी पुलवामा
नए-नए आतंकी ये देता है जहान को

भेजा था कसाब तूने मर्यादा भी तोड़ी तूने
पर झुका नहीं सका भारत महान को

सब्र जब टूट गया गुस्सा जब फूट गया
मिटा देंगे हम ऐसे कुत्ते पाकिस्तान को

वीर योद्धा महाराणा प्रताप

दशो दिशायें गूँज उठी थी,
जब वो रण में आया था।
देख उसकी प्रचण्ड ज्वाला,
दुश्मन भी घबराया था ।।


खनक उठी मेवाड़ की भूमि,
रक्त रंजित शमशीरो से ।
गाथा यही सुनी है हमनें,
मुर्शिद और फकीरो से ।।


मार्तण्ड सा तेज चमकता,
वो एक प्रचण्ड ज्वाला था।
अकबर भी जिससे घबराया,
वो वीर महाराणा था ।।


जब वो रण में आता था,
मानो आती थी आंधी ।
अकबर काँपा था दिल्ली का,
भय भीत थे सुर संवादी ।।


भाला जब उठाया मान पर,
राणा सिंह सी गर्जन था ।
राणा ने मान के मान का,
जब किया मान-मर्दन था ।।


अरे जब मान का मान गिरा,
यदा मान भी मान गया ।
जाकर छुपा होदें में मान,
प्रताप को पहचान गया ।।


गूंज रही थी टॉप चेतक की,
हल्दीघाटी के रण में।
बहादुरी जिसकी देखी थी,
मेवाडी भू के कण में ।।


छब्बीस फिट नाले को फांद,
वो साहस दिखलाया था।
बरछी तीर व तलवारो से,
वीर नहीं  घबराया था ।।

रविवार, 1 मार्च 2020

अखण्ड भारत


यह हिंद है बगीचा ऐसा, जहां फूल सब खिलते हैं।
हिंदू मुस्लिम जैन ईसाई, आपस में जब मिलते हैं।।
ना हिंदू की गीता बुरी है, ना ही मुस्लिम का कुरान।
राजनीति चक्कर में यारों, इन्सान बन रहा शैतान।।
इन्सान बन रहा है शैतान, अपना धर्म बढ़ाने को।
भाई को भाई काट रहा, सत्ता की कुर्सी पाने को।।
क्या ये क़त्ल और लूट मार,तारीफ़ यह ईमान की।
क्या आपस में लड़ना मरना, तालीम यही कुरान की।।
वेद उपनिषद व कुरान भी, भाईचारा सिख लाते।
हैं धर्मों के कुछ ठेकेदार,जो आपस में लड़ वाते।।
उन बीते पल को याद करो,कितने बरबाद हुये थे।
चने चबाये थे गोरो को,तब हम आजाद हुये थे।।
नफरत की इस आंधी में अब,वतन अपना बचा ले हम।
हिन्दू मुस्लिम व सिख ईसाई,एकता को बतला दे हम ।।

रंगी छन्द

रंगी छन्द  4 वर्ण मापनी - गालगागा पिंगल सूत्र - र ग शारदे माँ तारदे माँ ठान ऐसी  भान जैसी रात आयी  ज्योति छायी मान दे माँ शारदे माँ नींद आयी...