दशो दिशायें गूँज उठी थी,
जब वो रण में आया था।
देख उसकी प्रचण्ड ज्वाला,
दुश्मन भी घबराया था ।।
खनक उठी मेवाड़ की भूमि,
रक्त रंजित शमशीरो से ।
गाथा यही सुनी है हमनें,
मुर्शिद और फकीरो से ।।
मार्तण्ड सा तेज चमकता,
वो एक प्रचण्ड ज्वाला था।
अकबर भी जिससे घबराया,
वो वीर महाराणा था ।।
जब वो रण में आता था,
मानो आती थी आंधी ।
अकबर काँपा था दिल्ली का,
भय भीत थे सुर संवादी ।।
भाला जब उठाया मान पर,
राणा सिंह सी गर्जन था ।
राणा ने मान के मान का,
जब किया मान-मर्दन था ।।
अरे जब मान का मान गिरा,
यदा मान भी मान गया ।
जाकर छुपा होदें में मान,
प्रताप को पहचान गया ।।
गूंज रही थी टॉप चेतक की,
हल्दीघाटी के रण में।
बहादुरी जिसकी देखी थी,
मेवाडी भू के कण में ।।
छब्बीस फिट नाले को फांद,
वो साहस दिखलाया था।
बरछी तीर व तलवारो से,
वीर नहीं घबराया था ।।
देख उसकी प्रचण्ड ज्वाला,
दुश्मन भी घबराया था ।।
खनक उठी मेवाड़ की भूमि,
रक्त रंजित शमशीरो से ।
गाथा यही सुनी है हमनें,
मुर्शिद और फकीरो से ।।
मार्तण्ड सा तेज चमकता,
वो एक प्रचण्ड ज्वाला था।
अकबर भी जिससे घबराया,
वो वीर महाराणा था ।।
जब वो रण में आता था,
मानो आती थी आंधी ।
अकबर काँपा था दिल्ली का,
भय भीत थे सुर संवादी ।।
भाला जब उठाया मान पर,
राणा सिंह सी गर्जन था ।
राणा ने मान के मान का,
जब किया मान-मर्दन था ।।
अरे जब मान का मान गिरा,
यदा मान भी मान गया ।
जाकर छुपा होदें में मान,
प्रताप को पहचान गया ।।
गूंज रही थी टॉप चेतक की,
हल्दीघाटी के रण में।
बहादुरी जिसकी देखी थी,
मेवाडी भू के कण में ।।
छब्बीस फिट नाले को फांद,
वो साहस दिखलाया था।
बरछी तीर व तलवारो से,
वीर नहीं घबराया था ।।
Bhut khub sr ji bhut Hi accha laga
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