अपने ही घर में सेना से,
पत्थर वाले ऐंठे है।
सुकमा में नक्सली जवानो,
की लाशों पे बैठे है।।
जाने किस नशे में खो गए,
ये नेता गद्दी वाले।
प्रवक्ता इस तरह बनते है,
जैसे हो रद्दी वाले।।
सुकमा में शहीद हुये जो,
किसी बहन के भाई थे।
अपने ही मात-पिता की वो,
ज़िन्दगी की कमाई थे।।
जिस छप्पन इंची सीने से,
बड़े- बड़े घबराते है।
फिर भी क्यूँ हमारे सैनिक,
घर में थप्पड़ खाते है।।
जज्बा है सब कुछ करने का,
करता कहता वो मोदी।
पर्वत के चट्टानों से ही,
झरना बहता वो मोदी।।
शीश झुका दिनेश नमन करे,
उन सैनिक मतवालो को।
मातृभूमि पर मिटने वाले,
भारत के रखवालो को।।
पत्थर वाले ऐंठे है।
सुकमा में नक्सली जवानो,
की लाशों पे बैठे है।।
जाने किस नशे में खो गए,
ये नेता गद्दी वाले।
प्रवक्ता इस तरह बनते है,
जैसे हो रद्दी वाले।।
सुकमा में शहीद हुये जो,
किसी बहन के भाई थे।
अपने ही मात-पिता की वो,
ज़िन्दगी की कमाई थे।।
जिस छप्पन इंची सीने से,
बड़े- बड़े घबराते है।
फिर भी क्यूँ हमारे सैनिक,
घर में थप्पड़ खाते है।।
जज्बा है सब कुछ करने का,
करता कहता वो मोदी।
पर्वत के चट्टानों से ही,
झरना बहता वो मोदी।।
शीश झुका दिनेश नमन करे,
उन सैनिक मतवालो को।
मातृभूमि पर मिटने वाले,
भारत के रखवालो को।।
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