*धर्म की जीत*
*हाइकू*
हे! पार्थ सुनो
मोह माया को त्यागो
शत्रु को चुनो।
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उठाओ तीर
कोई नहीं अपना
ना हो अधीर।
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नयन खोलो
शत्रु खड़ा सामने
हमला बोलो।
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नहीं है मीत
लड़ने से ही होगी
धर्म की जीत।
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*रचनाकार*
*कवि दिनेश तूफानी*
*सिकन्दरा, दौसा*
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