लोह पथ गामिनी की तरह दौड़ रही है।
खूब मन से पढ़ाई करता हूं दिन-रात,
न जाने छोरियां क्यू पीछे छोड़ रही है।।
यह बात मुझे भी समझ नहीं आती है,
कि यह छोरियां स्मृति काहे से बढ़ाती है।
काजू,बादाम,पिस्ता खूब खाता हूँ,
फिर भी कक्षा में अव्वल नहीं आता हूँ।।
पास होने के लिए लड़कियां नेट चलाती हैं,
मेरी मां मेरे लिए अखंड ज्योति जलाती है।
मैं हो जाऊं पास इस उम्मीद में मेरी भुआ,
फूफाजी से हर महीने गुड-चने बँटवाती है।।
छोरियाँ वेशभूषा ही ऐसी पहन कर आती है,
पाठशाला के छोरो का जी ललचा जाती है।
दिनभर कहते हैं ये तेरी भाभी वह मेरी भाभी,
तभी हम फैल और छोरियाँ पास हो जाती हैं।।