सोमवार, 25 सितंबर 2023

हिंदी है मेरा हिंदुस्तान


 *हिंदी है मेरा हिंदुस्तान*


वागीशा वंदन है हिंदी, माथे का चंदन हिंदी।

पन्ना का नंदन है हिंदी,गोरो का मर्दन हिंदी।।


सूरदास की वाणी में बस, भक्ति भाव सिखाती है।

तुलसी से तुलसीकृत होकर, रामायण बन जाती है।।


रस की खान रसखान में, मृदुल बनी है मीरा में।

दोहे बन कर उपजी हिंदी, सुबोध संत कबीरा में।।


अम्बर का पानी फुनगी पर, ओस बन चमचमाता है।

पुष्प खिले हो उपवन में तो, भंवरा गुनगुनाता है।।


अंग्रेजो की अंग्रेजी का, हमने था सम्मान किया।

हुए अत्याचार हिंदी पर, हमनें सीना तान लिया।।

 

हिंदी भाषा सीने में रख, मन ही मन इठलाता हूँ।

मुझे नहीं गाना इलू इलू, वन्दे मातरम् गाता हूँ।।


नहीं किसी से नफरत मुझको,नही मुझमे है अभिमान।

मां हिंदी है भाषा मेरी, हिंदी है मेरा हिंदुस्तान।।


रचनाकार

कवि दिनेश तूफानी, सिकन्दरा

दौसा, राजस्थान

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