फूलों का श्रंगार लिए।
खिल गए फूल अनन्त,
आ गया देखो प्यारा बसंत।
फूलों से खेत हो रहे हरे-भरे,
पक्षी गीत गा रहे भावना भरे।
नर नारी और झूमे साधु संत,
आ गया देखो प्यारा बसंत।।
नदियां फूलों से श्रृंगार करें,
धरा भी किरणों से मांग भरे।
गज भी मांजे अपने दन्त,
आ गया देखो प्यारा बसंत।।
जीवन का हर पल नया होगा,
उत्साह और उमंग भरा होगा।
रंगों की बहार है चली अनन्त,
आ गया देखो प्यारा बसंत।।
रातें भी अब सिकुड़ जाएंगी,
नव में नई ज्योति छा जाएगी।
तभी हो जाएगा सर्दी का अंत,
आ गया देखो प्यारा बसंत।।
गा रही कोयल मीठे गान,
भँवरे भी भर रहे हैं तान।
तूफानी सूंघ रहा है सुगंध,
आ गया देखो प्यारा बसंत।।