रविवार, 30 जनवरी 2022

शेर*

 *गज़ल*

*बहर 2122 2122 1222*

छोड़ दी नफरत मिरे में जरा सी भी
गैर से मोहब्बत के फायदे का क्या

वो नहीं आये मिरी मय्यत पर भी अब
तोड़ तूने ही दिये वायदे का क्या

बन नही पायी ग़ज़ल "तूफानी" अब भी
अब हवा जो हो रहे कायदे का क्या

रचनाकार:-
*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*

रंगी छन्द

रंगी छन्द  4 वर्ण मापनी - गालगागा पिंगल सूत्र - र ग शारदे माँ तारदे माँ ठान ऐसी  भान जैसी रात आयी  ज्योति छायी मान दे माँ शारदे माँ नींद आयी...