शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

डाँ भीम राव अम्बेडकर

ये कैसी मानवता जिसमें मुझे बाहर बैठाकर पढ़ाया गया,

ये कैसी मानवता जिसमें नौकरी जाने पर कालीन उठाया गया,

कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को एक बताने वालों,

ये बताओ महाड का पानी पीने पर पत्थर क्यू बरसाया गया।


पत्थर क्यू बरसाया गया क्या मैं सचमुच अपवित्र था,

जानवर पिये भले पानी मैनें पिया तो डाला गोमूत्र था,

मैं मानव होकर भी जल तालाब का पी नहीं सकता,

 सूअर,कुत्ते,गाय,भैंस के पीने पर भी जल पवित्र था।


कहते हो नहीं भेद है जाति धर्म का मानवता का मूल यहाँ,

कई वर्षों से आज तक भी जातिवाद फैला है यहां,

दलित दलित कह कर प्रताड़ित हमें किया जाता है,

मानव होकर मानवता के सुख से वंचित किया जाता है।


याद करो उन दलितों को जो देश हित में आगे आए,

मर गई भले झलकारी पर झांसी के प्राण बचाए,

सत्य का ज्ञान हुआ ऋषि संभुक को तो मार डाला,

लेकिन गुरु के खातिर कालीबाई ने भी प्राण गंवाए।


हे! मेरे हिंद देश के लोगों अब तो जरा जाग जाओ,

जातिवाद से हुआ खंड-खंड भारत को अब बचाओ,

हाथ जोड़ विनती करे दिनेश तुम हिंद के लोगों से,

खण्ड - खण्ड हुये भारत को पुनः अखंड बनाओ।।


रचनाकार 

कवि दिनेश प्रजापति"तूफानी",सिकन्दरा

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