रविवार, 28 फ़रवरी 2021

प्यारा बसन्त

गीतों का मल्हार लिए,

फूलों का श्रंगार लिए।

खिल गए फूल अनन्त,

आ गया देखो प्यारा बसंत।


फूलों से खेत हो रहे हरे-भरे,

पक्षी गीत गा रहे भावना भरे।

नर नारी और झूमे साधु संत,

आ गया देखो प्यारा बसंत।।


नदियां फूलों से श्रृंगार करें,

धरा भी किरणों से मांग भरे।

गज भी मांजे अपने दन्त,

आ गया देखो प्यारा बसंत।।


जीवन का हर पल नया होगा,

उत्साह और उमंग भरा होगा।

रंगों की बहार है चली अनन्त,

आ गया देखो प्यारा बसंत।।


रातें भी अब सिकुड़ जाएंगी,

नव में नई ज्योति छा जाएगी।

तभी हो जाएगा सर्दी का अंत,

आ गया देखो प्यारा बसंत।।


गा रही कोयल मीठे गान,

भँवरे भी भर रहे हैं तान।

तूफानी सूंघ रहा है सुगंध,

आ गया देखो प्यारा बसंत।।

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