*हो हरित वसुन्धरा*
चाहते हो दुरुधरा हो हरित वसुन्धरा
जीवन को जीना है तो कल होना चाहिए।
जिंदगी है बचानी तो मत करो मनमानी
शुद्ध वायु वाला हर पल होना चाहिए।
खाये गए जड़, तना, पत्ती और टहनियां
फूल जो बचाया है तो फल होना चाहिए।
सूख गए ताल तलैया और नदियां प्यारे
बचाना है इनको तो जल होना चाहिए।
-: रचनाकार :-
कवि दिनेश तूफानी, सिकन्दरा,दौसा
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