*कुर्सी की महाभारत*
कैसी हो गयी है सत्ता,बना दिया हमें कुत्ता
आगे पीछे नेताओं के नहीं होना चाहिये।।
नहीं है किसी के सगे,देते जनता को दगे,
लोभी सत्ता का भी अनुमान होना चाहिये।।
जुगनू बन जी रहे हम रात अँधेरी में,
जीवन में हमारे भी भान होना चाहिये।।
कुर्सी की महाभारत समझाये ऐसे मुझे,
यादव का फिर गुणगान होना चाहिये।।
रचनाकार:-
कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा
दौसा(राजस्थान)
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