शुक्रवार, 10 जून 2022

कुर्सी की महाभारत

 *कुर्सी की महाभारत*


कैसी हो गयी है सत्ता,बना दिया हमें कुत्ता

आगे पीछे नेताओं के नहीं होना चाहिये।।


नहीं है किसी के सगे,देते जनता को दगे,

लोभी सत्ता का भी अनुमान होना चाहिये।।


जुगनू बन जी रहे हम रात अँधेरी में,

जीवन में हमारे भी भान होना चाहिये।।


कुर्सी की महाभारत समझाये ऐसे मुझे,

यादव का फिर गुणगान होना चाहिये।।


रचनाकार:-

कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा

दौसा(राजस्थान)


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

रंगी छन्द

रंगी छन्द  4 वर्ण मापनी - गालगागा पिंगल सूत्र - र ग शारदे माँ तारदे माँ ठान ऐसी  भान जैसी रात आयी  ज्योति छायी मान दे माँ शारदे माँ नींद आयी...