बुधवार, 3 जनवरी 2024

रंगी छन्द

रंगी छन्द 

4 वर्ण

मापनी - गालगागा

पिंगल सूत्र - र ग


शारदे माँ

तारदे माँ


ठान ऐसी 

भान जैसी

रात आयी 

ज्योति छायी

मान दे माँ

शारदे माँ


नींद आयी 

ख्वाव लायी

भोर आती 

आस लाती

ज्ञान दे माँ

शारदे माँ


गीत गाना

प्रीत पाना

शक्ति देना

मुक्ति देना

पाप से माँ

शारदे माँ


ध्यान देना

मान देना

साज द्वारा

काज प्यारा

आप से माँ

शारदे माँ


रचनाकार

*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*

बुधवार, 27 दिसंबर 2023

तूफानी छन्द

.         तूफानी छन्द

विधान :- १२ वर्ण, प्रतिचरण
चार चरण, दो दो समतुकांत
नगण  रगण  तगण  यगण
१११  २१२  २२१  १२२

.          जटिल प्रेम
कमल फूल सी आँखे लगती हो।
नयन धार वर्षा सी झरती हो। 
जटिल प्रेम राही को अटकाता। 
विमल कर्म से मानो भटकाता।।

मलय वात आती है सहता हूँ
उछल नींद जाती है कहता हूँ।
अब तरंग जागी है तन मेरे।
यह प्रतीत लागी है मन मेरे।

सतत पंख से पंछी उड़ते हैं। 
गरल शंभु ही धारा करते हैं।
कठिन है भुलाना ये सब नाते।
लेकिन याद है प्यारे कतराते।।

अटल धर्म के साथी बन जाना।
अब दिनेश तूफानी हित गाना। 
गण गणेश के द्वारे पर गाए। 
चढ़ पहाड़ की सीढ़ी सब आए।।

अटल बिहारी जी (मनहरण)

 हमेशा रहे अटल, धर्म के लिए अचल

शांति सुरक्षा के लिए, रहे अविराम है।


सर्व शिक्षा अभियान, है अटल पहचान

आज पग पग पर, लगे अभिराम है।


पल पल करे प्रीत, गाये नहीं झूठे गीत

हम सब का करते, जो एहतराम है।


देश के ख़ातिर जिए,ऐसी महान आत्मा को, 

कवि दिनेश तूफानी, करता प्रणाम है।

सोमवार, 25 सितंबर 2023

दोहा संग्रह

 भोर हुई दिन चढ़ गया, खग भी गाते गान।

त्यागो निद्रावेश जन , अब तो खुद को जान।।


ये साल भी बीत गया,नहीं मिली पर ठौर।

कोरोना के काल में,जाऊ मैं *किस और*।।


छोटे से एक गांव में,रहता नवल किशोर।

लोकार्पण पुस्तक का,नाम है *किस और*।।


माँ मूरत है स्नेह की, माँ जीवन का सार।

माँ मेरी पहचान है, माँ मेरा आधार।।


दूर रहे अज्ञानता, हो चित ज्ञान प्रकाश।

भक्ति भाव मिलता रहे, मुझको माँ से आस।।


उमड़ घुमड़ बादळ चल्यौ, चांद छुप्यौ गिगनार ।

जागै जा की ज़ीत हैं , सोवैं जा की हार।।


बढ़ता पेड़ बबूल का, कांटे ही बरसाय

डाली पर डाली लगी, फूल कहाँ पर आय


पत्थर पड़ा जमीन पर,दर दर ठोकर खाय

बने देव खा चोट को,हर जन शीश नवाय


नरकासुर का वध किया, उत्तम भये विचार।

चतुर्दर्शी थी रूप की, सजता रूप अपार।।


हिंदी है मेरा हिंदुस्तान


 *हिंदी है मेरा हिंदुस्तान*


वागीशा वंदन है हिंदी, माथे का चंदन हिंदी।

पन्ना का नंदन है हिंदी,गोरो का मर्दन हिंदी।।


सूरदास की वाणी में बस, भक्ति भाव सिखाती है।

तुलसी से तुलसीकृत होकर, रामायण बन जाती है।।


रस की खान रसखान में, मृदुल बनी है मीरा में।

दोहे बन कर उपजी हिंदी, सुबोध संत कबीरा में।।


अम्बर का पानी फुनगी पर, ओस बन चमचमाता है।

पुष्प खिले हो उपवन में तो, भंवरा गुनगुनाता है।।


अंग्रेजो की अंग्रेजी का, हमने था सम्मान किया।

हुए अत्याचार हिंदी पर, हमनें सीना तान लिया।।

 

हिंदी भाषा सीने में रख, मन ही मन इठलाता हूँ।

मुझे नहीं गाना इलू इलू, वन्दे मातरम् गाता हूँ।।


नहीं किसी से नफरत मुझको,नही मुझमे है अभिमान।

मां हिंदी है भाषा मेरी, हिंदी है मेरा हिंदुस्तान।।


रचनाकार

कवि दिनेश तूफानी, सिकन्दरा

दौसा, राजस्थान

सोमवार, 19 जून 2023

चौपाई छन्द

*चौपाई छन्द*

ज्येष्ठ भ्राता अनुज अनुरूपा,
निज नगर नहीं कोई दूजा।
देख छवि गयी मैं बलिहारी, 
रूप अनोखा है अति भारी।
पुर नूतन पीताम्बर साजे,
बाएं बाहु कमान विराजे।
चौदहों भवन तीनों लोका,
ऐसा रूप कबहुँ नहीं देखा।।

*रचनाकार*
*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*
*दौसा (राजस्थान)*

सरस्वती स्तुति

 *सुगति छन्द*


      7 मात्रा 

मपनियुक्त मात्रिक 

मापनी - गालगागा


*सुगति छन्द*

*सरस्वती स्तुति*


प्रेम पाना

गान गाना

ज्ञान दे माँ

शारदे माँ


रंग चोखा

है अनोखा

रूप दे माँ

शारदे माँ


छवि मनोहर

ह्रदय सागर

तार दे माँ

शारदे माँ


स्थान तेरा

स्नेह मेरा

मान दे माँ

शारदे माँ


*रचनाकार*

*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*

*दौसा (राजस्थान)*

रविवार, 18 जून 2023

धर्म की जीत

 *धर्म की जीत*

*हाइकू*


हे! पार्थ सुनो

मोह माया को त्यागो

शत्रु को चुनो।


*******


उठाओ तीर

कोई नहीं अपना

ना हो अधीर।


********


नयन खोलो

शत्रु खड़ा सामने

हमला बोलो।


*********

नहीं है मीत

लड़ने से ही होगी

धर्म की जीत।


*********


*रचनाकार*

*कवि दिनेश तूफानी*

*सिकन्दरा, दौसा*


शुक्रवार, 10 जून 2022

किसान की पीड़ा

 *किसान की पीड़ा*


मैने सींचा लहू पसीना, 

अर्पण किया सारा जीवन।

तन मन सब कुछ त्यागा मैने,

तब मिला है तुम्हे संजीवन।।


तपती धरा तपता आसमा,

कठिन परिश्रम मैं करता।

तभी भूख से व्याकुल मानव,

अपना पुष्पपथ है भरता।।


हम तो विज्ञापन है सत्ता के,

हर बार दिखाये जाते।

हम जीते रहे गरीबी में,

और नेता सत्ता पाते।।


आते ही सत्ता, भूल जाते,

ये खादी टोपी वाले।

मलहम लगाने का इन्तजार,

हाथो में पाये छाले।।


उम्मीदों पर फिर गया पानी ,

मिल रही हमको निराशा।

अमीरो की कोटियाँ भरने,

समझा है हमें धनाशा।।


अब तो समझो मेरी पीड़ा,

सज्जनों मत रहो तुम मौन,

पहचानो मुझको भी अब तुम,

आखिर मैं हूँ यारो कौन?


-:रचनाकार:-

कवि दिनेश कुमार प्रजापत"तूफानी"

सिकन्दरा,दौसा(राजस्थान)



कुर्सी की महाभारत

 *कुर्सी की महाभारत*


कैसी हो गयी है सत्ता,बना दिया हमें कुत्ता

आगे पीछे नेताओं के नहीं होना चाहिये।।


नहीं है किसी के सगे,देते जनता को दगे,

लोभी सत्ता का भी अनुमान होना चाहिये।।


जुगनू बन जी रहे हम रात अँधेरी में,

जीवन में हमारे भी भान होना चाहिये।।


कुर्सी की महाभारत समझाये ऐसे मुझे,

यादव का फिर गुणगान होना चाहिये।।


रचनाकार:-

कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा

दौसा(राजस्थान)


महावीर जयंती

 *महावीर जयंती*


हिंसा व जात-पात जिस युग में बढ़ गया,

उस युग में स्वामी महावीर का जन्म हुआ।।


स्वामी महावीर प्रभु ही जगत विभासक,

सत्य अहिंसा और प्रेम के हो उपासक ।।


अपरिग्रह,अचौर्य,ब्रह्मचर्य,सत्य,अहिंसा,

का तुमने स्वामी पंचशील सिद्धांत दिया।।


त्याग,संयम,प्रेम,करुणा,शील,सदाचार, 

महावीर के प्रवचनों का हमे मिला सार।।


बैरी-बैर से शांत नहीं होवे यही सिखाया

शत्रुता का भाव त्याग प्रेम से गले लगाया।।


धर्म जगत की प्रत्येक आत्मा है समान

*जीओ और जीने दो* का हमे मिला ज्ञान।।



-:रचनाकार:-

कवि दिनेश कुमार प्रजापत"तूफानी"

सिकन्दरा,दौसा(राजस्थान)


कह मुकरी

 *कह मुकरी*


यह विधा चार पंक्तियों की रचना है। इस विधा में दो सखियों परस्पर वार्तालाप करती है। जिसकी प्रथम तीन पंक्तियों में एक सखी अपनी दूसरी अंतरंग सखी से अपने साजन/पति के बारे में अपने मन की कोई बात कहती है। परन्तु यह बात कुछ इस प्रकार कही जाती है कि अन्य किसी बिम्ब पर भी सटीक बैठ सकती है। जब दूसरी सखी पहली से यह पूछती है कि क्या वह अपने साजन के बारे में बतला रही है, तब पहली सखी लजा कर चौथी पंक्ति में अपनी कही बात से मुकरते हुए कहती है कि नहीं वह तो किसी दूसरी वस्तु के बारे में कह रही थी ! इस प्रकार कह कर मुकर जाने वाली *कह मुकरियां* प्रेषित है।



साँझ पड़े वो घर पर आवे

आवे मन शीतल हो जावे

देख उसे मन में आनंदा।

क्या सखि साजन.? ना सखि चंदा!


सोऊँ लिपट लगे ना जाड़ा

दिल से नरम देह से गाढा

ठण्ड वास्ते पलंग सजाई

क्या सखि साजन.? न सखि रजाई!


नाक मुँह को वही छुपावे

कोरोना को दूर भगावे

पूरा करते है जब टास्क

क्या सखि साजन.? ना सखि मास्क!


शादी में वा धूम मचावे

जब जब बोले तान छुडावे

प्यारे लागे वा के बोल

क्या सखि साजन.?ना सखि ढोल!


  *-:रचनाकार :-*

*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*

      *दौसा (राजस्थान)*



हो हरित वसुन्धरा

 *हो हरित वसुन्धरा*


चाहते हो दुरुधरा हो हरित वसुन्धरा

जीवन को जीना है तो कल होना चाहिए।


जिंदगी है बचानी तो मत करो मनमानी

शुद्ध वायु वाला हर पल होना चाहिए।


खाये गए जड़, तना, पत्ती और टहनियां

फूल जो बचाया है तो फल होना चाहिए।


सूख गए ताल तलैया और नदियां प्यारे

बचाना है इनको तो जल होना चाहिए।


-: रचनाकार :-

कवि दिनेश तूफानी, सिकन्दरा,दौसा


मन का मौसम

     *मन का मौसम*         


               मैं

              मन

           बड़ा ही

          चंचल हूँ

        बदल जाना

       मेरी आदत है

     मौसम की तरह

    बदलती है प्रकर्ति

और मैं पवन के झोकों

  के साथ साथ जगह

     जगह ललचाता

       घूमता रहता

        हूँ गतिशील

         होने से मैं

          कभी भी

            दू:ख

              पा

            लेता

          हूँ और

        कभी सुख

       व कभी कभी

      रुक जाता हूँ हाँ

     जिस जिसने मुझे

    पहचान लिया और

  मुझ पर काबू पा लिया

   ज्ञानी होता चला गया

     एक बार तो देख

      मन का मौसम

       बदलना भी

         बंद कर

         देगा हाँ

           देख

            तो

           सही

          तूफानी

         कलम से

       परिज्ञान को

      दिनेश तूफानी

    अपनी ही लेखनी

   से लिखता है अपने 

  मन की बात और वह

वीणापाणी का अज्ञानी

  छोटा सा अबोध सा

    बाल रूपी भक्त

     और साहित्य

       का सेवक

         बालक

          रूपी

            है।


        *-:रचनाकार :-*

*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*

      *दौसा (राजस्थान)*


रविवार, 1 मई 2022

मैं एक मजदूर हूँ।


 *मैं एक मजदूर हूँ*


पेट भरने को मैं इतना क्यों मजबूर हूँ।

तुम मालिक हो और मैं एक मजदूर हूँ।


तन ढकने को वही फटा पुराना लिबास

कंधे पर पड़े हुए बोझ का है अहसास।


खुले आकाश की धुप और तपती धरती

ये जिंदगी मुझसे निरन्तर सवाल करती।


गरीबी लाचारी ने मुझे हँसना भुला दिया

बच्चों के पापी पेट ने भी मुझे रुला दिया।


हाथो में पड़े छाले पैरो में फटी बिवाई है

तब मुझे दो वक्त की रोटी मिल पाई है।


धधकते हुए सूरज से आँख मिलाता हूँ

तब जाकर मैं बच्चों का पेट भर पाटा हूँ।


पर्वत काट काट कर मैने सड़क बनाई

उसी सड़क पर तुमने गाडी फिर दौड़ाई।


सड़क पर नंगे पैर चलने को मजबूर हूँ

साहब सुविधाओं से दूर एक मजदूर हूँ।


अभावों में पला बड़ा फिर भी भरपूर हूँ 

तुम मालिक हो और मैं एक मजदूर हूँ।


-: रचनाकार :-

कवि दिनेश कुमार प्रजापति"तूफानी"

सिकन्दरा,दौसा

मंगलवार, 8 मार्च 2022

नारी शक्ति

*अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नारियों के सम्मान में*



घर-घर में पूजो नारी को, 

कभी नहीं पछताओगे।

कर लो नारी का सम्मान यदि,

तो जग में तर जाओगे।


नारी का प्रेम स्पर्श मन में,

वह एहसास दिलाता है।

नारी के ही आंचल में से,

भूमंडल भर जाता है।।


मुसीबत को हराने वाली,

सावित्री भी नारी थी।

प्राण बचा कर सत्यवान के,

गयी मौत पर भारी थी।।


माँ टेरिसा बनकर जग को,

प्रेम का पाठ पढ़ाती है।

गृहणी बन कर के भी नारी,

घर को स्वर्ग बनाती है।।


शबरी बनकर शूल मिटादे

बस वो ही तो नारी है।

माँ बनकर कुमाता ना हुई,

बेटे पर बलिहारी है।।


अबला ना नारी सबला है

नारी शक्ति है, सम्मान है।

नारी को *दिनेश तूफानी*

करता शत-शत प्रणाम है।।


*🖋️रचनाकार🖋️*

*कवि दिनेश प्रजापति "तूफानी",सिकन्दरा*

*दौसा (राजस्थान)*

*सम्पर्क-9610276946*

सोमवार, 7 मार्च 2022

घनाक्षरी (राजनीति)

 

घनाक्षरी (राजनीति)


सुनो कभी मत आना तुम मेरे प्यारे कान्हा,

डीजे की धुन किसे यहाँ बंसी सुनाओगे।।


जगह जगह लुटती इज्जत नारियों की,

द्रोपदी की जैसे कितना चीर बढ़ाओगे।।


घर घर मिलेगी शराब तुम्हे साँवरिया,

माखन मिश्री वाला भोग कैसे लगाओगे।।


आ गए अगर तुम दीनानाथ यहाँ पर,

आते ही राजनीति में मुद्दा बन जाओगे।।


रचनाकार:-

कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा

दौसा(राजस्थान)

शुक्रवार, 4 मार्च 2022

महाशिवरात्रि

 

******

नीलकंठ भोलेनाथ,गंगाधर गौरीनाथ

मन में हे! पशुपति,

आशा बन जाइये।।


होवे नहीं बुरे काम,होवे रोज अच्छे काम

मेरे नयनों की तुम, 

छवि बन जाइये।।


छाई जग में निराशा,तुम से ही बस आशा

नफरत का जहर,

तुम ही पी जाइये।।


करो विश्व का कल्याण, मेरे प्यारे विश्वनाथ

महा शिवरात्रि पर, 

वास कर जाइये।।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

*-:रचनाकार:-*

*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*

*दौसा(राजस्थान)*

रविवार, 30 जनवरी 2022

शेर*

 *गज़ल*

*बहर 2122 2122 1222*

छोड़ दी नफरत मिरे में जरा सी भी
गैर से मोहब्बत के फायदे का क्या

वो नहीं आये मिरी मय्यत पर भी अब
तोड़ तूने ही दिये वायदे का क्या

बन नही पायी ग़ज़ल "तूफानी" अब भी
अब हवा जो हो रहे कायदे का क्या

रचनाकार:-
*कवि दिनेश तूफानी,सिकन्दरा*

रंगी छन्द

रंगी छन्द  4 वर्ण मापनी - गालगागा पिंगल सूत्र - र ग शारदे माँ तारदे माँ ठान ऐसी  भान जैसी रात आयी  ज्योति छायी मान दे माँ शारदे माँ नींद आयी...